।।  श्री गणेशदत्तगुरुभ्योनम:  ।।

                     श्री दत्तमहाराज की इच्छानुसार श्री प.प.नृसिंह सरस्वती महाराज का अगला अवतार माणगांव में हुआ|वह अवतार अर्थात श्री गणेशभट्ट और सौ.रमाबाई के पुत्र रुप में| अर्थात (अलबत्ता) वासुदेवशास्त्री टेंब्ये जी ही है संन्यास के बाद श्री प.प.वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी महाराज मतलब अपने बडे महाराज|       
                     श्री वासुदेवशास्त्री जी की महानता इतनी थी कि उनके साथ प्रत्यक्ष श्री दत्त महाराज माणगांव में मंदिर स्थापना से अगले सात वर्षोतक उनके साथ रहे और ---- इससे ही माणगांव, श्री क्षेत्र माणगांव हो गया|
                     श्री दत्त संप्रदाय में अनेकोंने अवतार लिए हैं | लेकिन वासुदेवशास्त्री टेंब्ये और सन्यांस लेने के बाद के श्री परमहंस परिव्राजकाचार्य (प.प) वासुदेवानंद सरस्वती चारों आश्रम से होकर आखिर दत्तरुप हुए|आजकल के गृहस्थि युग में, गृहस्थधर्म निभाकर भी दत्तरुप कैसे हो सकते हैं, अथवा ईश्वर  के पास कैसे जा सकते हैं इसी का प्रत्यक्ष उदाहरण स्वामी महाराज हैं|
                     अंग्रेजों के सत्ताकाल में उन्होंने भारत में सनातन धर्म का प्रचार, प्रसार किया| बहुत ग्रंथसंपदा का निर्माण किया| भारत के विविध दत्तस्थानों की हमेशा की दिनचर्या आदि कार्यक्रमों का सुव्यवस्थित नियोजन किया| अनेकों को सन्मार्ग दिखाया|ऐसा महान कार्य अपने जीवन में किया| उनके आचार से सभी संन्यासियों के आदर्श के रुप में उन्हे देखा जाता है|
                    उनकी पत्नी सौ.अन्नपुर्णाबाई बडी तपस्विनी तथा योगविद्या में निपुण थीं| समाधि अवस्थ तक उनकी योगसाधना हुई थीं| गंगाखेड (परभणी) में उनका महानिर्वाण हुआ| स्वामी महाराज के छोटे भाई सीताराम अर्थात भलोबा और बाद में परमपूज्य ब्रहमीभूत (प.पू.ब्र) सीताराम महाराज भी उनके शिष्य बनेथे| वे ब्रहमचारी ही रहे|उनका चरित्र भी अध्ययन करने योग्य है| उन्होंने बडनेरा-झिरी (अमरावती) में समाधि ले ली।
                     श्री प. प. टेंब्ये स्वामी महाराज और महाराज श्री प. पू. ब्र. सीताराम महाराज जी का जन्मस्थान माणगांव है । प्रत्यक्ष श्री. प. प. नृसिंह सरस्वती की सेवा में रहनेवाली योगिनियों में से यक्षिणी देवी एक प्रमुख देवी थी । श्री प. प. नृसिंह सरस्वती ने कहा “ अगले अवतार से पहले तुम माणगांव जाओ, गांव बसाओ क्योंकी मेरा अगला अवतार माणगांव में होगा”। उनकी इच्छा से माणगांव की ग्रामदेवता श्री देवी यक्षिणी का एक मात्र मंदिर माणगांव में ही है। श्री प. प. टेंब्ये स्वामीजी के घर के सामने दो सौ मीटर दूरी पर श्री प. प. वासुदेवशास्त्री जी ने स्थापित किया हुआ पुर्वाभिमुख श्री दत्तमंदिर है।
                    

 

 
 
श्री दत्त मंदिर   श्री देवी यक्षिणी माता
     
 
श्री. प.प. टेंब्ये स्वामी (थोरले स्वामी) महाराज   प. पू. ब्रह्मीभूत श्री. सीताराम महाराज
     
 
श्री. प. प . वासुदेवशास्त्री टेंब्ये स्वामी ( माणगांव ) यांच्या धर्मपत्नी महायोगिनी सौ. अन्नपूर्णामाता टेंब्ये समाधीस्थान   श्री. प. प. वासुदेवानंद सरस्वती टेंब्ये स्वामी महाराज प्रबोधिनी
 

                                        इन सबकी जानकारी देने हेतु यह ‘ संकेतस्थल ’ निर्माण किया है। इस संकेतस्थळ का उद्घाटन श्री. प. प. टेंब्ये स्वामी महाराज के जन्म दिन के अवसर पर श्रावण ( सावन ) वद्य पंचमी शके 1933 (दि. 19-08-2011) को श्री क्षेत्र माणगांव में किया गया। इसके निर्माण में जिन्होंने प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रुप में संस्था को सहयोग दिया, संस्था की ओर से उनका अभिनंदन और आभार । अनेंकों का सहयोग मिलने से और सब के नाम लिखना असंभव होने से किसी का भी नामोल्लेख नहीं किया है।
                                         इस संकेतस्थल की जानकारी का इस्तेमाल व्यावसायिक दृष्टि रखकर न करें । भक्तों की जानकारी के लिए तथा व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए ही जानकारी दी है।

                                                                            धन्यवाद ।

वैद्य रामचंद्र जनार्दन गणपत्ये
अध्यक्ष
श्री दत्तमंदिर माणगांव
संकेतस्थळ प्रकाशन

(मराठी) – श्रावण (सावन) कृष्ण पंचमी शके १९३३ – १९-०८-२०११
(अंग्रेजी)- चेत कृष्ण नवमी शके १९३४ – १२-०४-२०१२
(हिंदी) – माघ कृष्ण प्रतिपदा(श्री गुरुप्रतिपदा) शके १९३४ – २६-०२-२०१३


।। अवधूत चिंतनः श्री गुरुदेव दत्त ।।