आरती दुर्गामातेची
दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारीं। अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारीं। वारी वारी जन्म-मरणांतें वारी। हारी पडलो आतां संकट निवारी।।१।। जयदेवी जयदेवी महिषासुरमथनी। सुरवर- ईश्र्वरवरदे तारक संजिवनी।।धृ०।। त्रिभुवनभुवनीं पाहतां तुजऐशी नाहीं। चारी…
